नहीं जानता के मँज़िल तक पहुँचेंगे भी ये रास्ते या नहीं,
फिर भी इन रास्तों में अब मैं उम्मीद की एक मशाल ढूँढता हूँ |
‐ 1 week ago by hotsonu999

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