ऐ मेरे हमनशी चल कहीं और
ऐ मेरे हमनशी चल कहीं और चल
इस चमन में अब अपना गुज़ारा नहीं
फूलों की बात होती तो सह लेते
अब तो कांटो पे भी हक हमारा नहीं ! :-(
‐ 4 years ago by sonu.patel71

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